जयपुर के बाहरी इलाके हरमाड़ा में 40 साल पुराने एक सरकारी बालिका विद्यालय की इमारत को पुनर्निर्माण के लिए करीब चार महीने पहले तोड़ा गया था। तब से मलबा जहां गिरा था वहीं पड़ा है — सितंबर 2026 के अंत तक करीब 120 दिनों से — और सटी हुई सड़क पर फैलकर एक नाली को अवरुद्ध कर रहा है, ऐसा साइट के पास रहने वाले निवासियों का कहना है, जिनमें से एक स्थानीय थाने के पास रहने वाली चंदा शर्मा भी हैं।
मानसून के महीनों के दौरान भी मलबे को नहीं छुआ गया, जिससे आसपास पानी जमा हो गया है, और निवासियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मलबा हटाने की ज़िम्मेदारी किसी भी एजेंसी ने नहीं ली है: तोड़फोड़ के महीनों बाद भी सफाई के लिए कोई टेंडर जारी नहीं हुआ, जिससे निवासियों को बिना किसी स्पष्ट समयसीमा के अवरुद्ध सड़क और जाम नाली से जूझना पड़ रहा है।
हरमाड़ा का यह स्कूल जयपुर भर से करीब इसी समय सामने आई कई अनसुलझी नागरिक शिकायतों में से एक है। इसी रिपोर्टिंग में मुहाना मंडी के गेट नंबर 3, मानसरोवर और सोडाला क्षेत्र की कॉलोनियों के डिवाइडरों, और वार्ड 73 के सेक्टर 2 के एक पार्क के पास कचरे के ढेर; वैभव नगर में 200 फीट बाइपास के एक हिस्से पर निर्माण सामग्री की डंपिंग, जहां निवासियों का कहना है कि नगर निगम व पुलिस से बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई; निर्माण नगर के किंग्स रोड के पास दो साल पुराना गड्ढा जिसमें सीवेज और बारिश का पानी जमा होता है; और सिविल लाइंस में करीब दो महीने से खुला पड़ा टूटा सीवर चैंबर कवर भी शामिल हैं। इस रिपोर्टिंग के बाद जेडीए ने कुछ प्रभावित सड़कों पर गिट्टी बिछाने का काम शुरू किया और डामरीकरण की योजना बनाई, लेकिन लेखन के समय तक हरमाड़ा स्कूल के मलबे और कई कचरा व जल निकासी संबंधी शिकायतों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया था।
हरमाड़ा साइट के आसपास रहने वाले निवासियों के लिए तात्कालिक खतरे सड़क सुरक्षा — मलबे से रास्ता संकरा या अवरुद्ध होना — और स्वास्थ्य को लेकर हैं, क्योंकि आवासीय इलाके में रुका पानी व मच्छर पनप रहे हैं। शहर के व्यापक स्तर पर देखें तो यह पैटर्न इस बात की ओर इशारा करता है कि तोड़फोड़ या निर्माण कार्य होने और उसके साथ होने वाले नियमित फॉलो-अप (मलबा हटाना, नाली की सफाई, सड़क मरम्मत) के बीच एक अंतर है, और मुख्य काम पूरा होने के बाद इस फॉलो-अप की ज़िम्मेदारी स्पष्ट रूप से किसी एक विभाग की नहीं होती।
यदि आप ऐसी किसी जगह के पास रहते हैं जहां तोड़फोड़, खुदाई या निर्माण का मलबा लंबे समय से बिना हटाए पड़ा है, तो यह न मान लें कि मुख्य काम पूरा होने की सूचना मिलते ही यह अपने आप हट जाएगा। एक लिखित शिकायत दर्ज करें जो मलबे या जल निकासी के खतरे को अलग से इंगित करे, और सामान्य आश्वासन के बजाय एक विशिष्ट ज़िम्मेदार विभाग व समयसीमा के लिए ज़ोर दें।